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Mummy Ki Saheli Ko Choda – विधवा आंटी की चूत से मजा लिया

Mummy Ki Saheli Ko Choda

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं २२ साल का हूँ और बिहार में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मेरी मम्मी का नाम रीना है। वो एक स्कूल टीचर हैं। मम्मी की सबसे अच्छी सहेली हैं आंटी प्रिया। आंटी करीब ४२ साल की हैं, लेकिन देखने में वो अभी भी ३० की लगती हैं। Mummy Ki Saheli Ko Choda

उनकी बॉडी तो ऐसी है कि कोई भी जवान लड़का एक बार देख ले तो बार-बार घूरने लगे। लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गोल-मटोल चेहरे पर हल्की सी मुस्कान, और सबसे खास उनकी फिगर – ३६-२८-३८। वो हमेशा साड़ी या सलवार-सूट पहनती हैं, लेकिन उनकी साड़ी का पल्लू इतना टाइट गिरता है कि उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ और कसी हुई कमर साफ दिख जाती है।

आंटी विधवा हैं। उनके पति की बहुत पहले मौत हो गई थी। इसलिए वो अक्सर मम्मी के घर आती रहती हैं। मम्मी उनसे बहुत प्यार करती हैं। मैं बचपन से आंटी को “आंटी” कहकर बुलाता था, लेकिन पिछले दो साल से मेरे मन में उनके लिए कुछ और ही भावनाएँ उभरने लगी थीं।

उनकी हँसी, उनकी चाल, उनका वो तरीका जिसमें वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर बात करती हैं – सब कुछ मुझे पागल कर देता था। लेकिन मैं कभी कुछ बोल नहीं पाता था।एक दिन मम्मी को अचानक ऑफिस से कॉल आया। उनकी सहेली की तबीयत खराब हो गई थी।

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मम्मी ने कहा, “राहुल, मैं शाम तक नहीं आऊँगी। प्रिया आंटी घर पर आ रही हैं। वो रात का खाना बना देंगी। तुम उनकी मदद करना।”

मैंने हाँ में सिर हिला दिया। दिल में एक अजीब सी खुशी हुई। आज आंटी अकेले आएँगी और पूरा दिन हम दोनों साथ रहेंगे। दोपहर के करीब दो बजे दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो सामने आंटी खड़ी थीं। आज उन्होंने हल्की गुलाबी साड़ी पहनी थी। ब्लाउज काफी डीप नेक वाला था। उनकी छातियों की गहराई साफ दिख रही थी।

“क्या हुआ बेटा? इतना घूर रहा है?” आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा।

मैं शरमा गया। “नहीं आंटी… बस… आप बहुत अच्छी लग रही हैं आज।” आंटी अंदर आईं। उन्होंने अपने जूते उतारे और सीधे किचन चली गईं। मैं उनके पीछे-पीछे गया। “मम्मी ने बताया था न? आज मैं खाना बनाऊँगी। तुम बैठो, मैं सब संभाल लूँगी।” लेकिन मैं नहीं माना।

मैंने कहा, “आंटी, मैं आपकी मदद करूँगा।” वो मुड़ीं और मेरी आँखों में देखा। उनकी नजर में कुछ अलग चमक थी। “अच्छा बेटा… तो आज तू मेरी मदद करेगा?”हम दोनों किचन में खड़े होकर सब्जी काटने लगे। आंटी मेरे बहुत पास खड़ी थीं। उनकी साड़ी की किनारी मेरे हाथ को छू रही थी।

उनका हल्का सा परफ्यूम मेरे नाक में घुस रहा था। मैंने देखा कि उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। उनकी नाभि साफ दिख रही थी। मेरी सांसें तेज हो गईं। “राहुल, तुझे लगता है मैं अभी भी आकर्षक हूँ?” आंटी ने अचानक पूछा। मैं चौंक गया। “आंटी… आप… आप तो बहुत खूबसूरत हैं। कोई भी कह सकता है।”

आंटी हँसीं। “अच्छा? तो फिर क्यों कभी मुझे ऐसे नहीं देखता जैसे आज देख रहा है?” मैंने नजरें झुका लीं। लेकिन आंटी ने मेरे चेहरे को अपनी उँगलियों से ऊपर उठाया। “शर्मा मत बेटा। मैं जानती हूँ तू मुझे पसंद करता है। मैं भी तुझे बहुत पसंद करती हूँ।” उस पल मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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आंटी ने आगे बढ़कर मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया। उनके होंठ नरम और गर्म थे। मैंने भी जवाब दिया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। आंटी की जीभ मेरे मुँह में घुस आई। हमारी सांसें मिल गईं। उनका हाथ मेरी कमर पर था और मेरा हाथ उनकी पीठ पर। “राहुल… आज मैं बहुत दिनों से सोच रही थी। मैं अकेली हूँ। तू भी जवान हो गया है। अगर तुझे भी अच्छा लगे तो… हम दोनों एक-दूसरे को खुशी दे सकते हैं।”

आंटी ने मेरे कान में धीरे से कहा। उनकी आवाज में इतनी प्यार भरी चाहत थी कि मैं तुरंत हाँ बोल गया। “आंटी, मुझे भी बहुत अच्छा लगेगा। मैं आपकी हर इच्छा पूरी करूँगा।” आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे बेडरूम में ले गईं। मम्मी का बेडरूम था।

उन्होंने दरवाजा बंद किया और पर्दे खींच दिए। कमरे में हल्का सा अंधेरा हो गया। आंटी ने मुझे बिस्तर पर बिठाया और खुद मेरे सामने खड़ी हो गईं। “देख बेटा… आज मैं पूरी तरह तेरी हूँ।उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया। उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ ब्लाउज के अंदर से उभर रही थीं।

ब्लाउज के हुक खोलते हुए उन्होंने कहा, “छू बेटा… इन्हें छू।” मैंने दोनों हाथों से उनकी छातियों को सहलाया। वो नरम और भारी थीं। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “हाँ… ऐसे ही… बहुत अच्छा लग रहा है।” फिर उन्होंने ब्रा भी उतार दी। उनकी गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुकी थीं।

मैंने एक निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी ने मेरे सिर को अपनी छातियों से दबाया। “आह… राहुल… कितना अच्छा चूसता है तू… मम्मी की सहेली आंटी की छातियाँ चूस रहा है… हाँ बेटा… और जोर से.” मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

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आंटी ने नीचे हाथ डालकर उसे पकड़ लिया। “वाह… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड।” उन्होंने पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। फिर उन्होंने घुटनों के बल बैठकर उसे चूसना शुरू कर दिया। उनकी गर्म और नरम जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैं कराह उठा, “आंटी… आह… बहुत अच्छा लग रहा है.”

कुछ देर चूसने के बाद आंटी उठीं। उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिए। अब वो सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी पैंटी पर एक बड़ा सा गीला धब्बा था। उन्होंने पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत पूरी तरह साफ और गुलाबी थी। छोटी-छोटी बालों की लाइन थी।

चूत की लिप्स थोड़ी सूजी हुई थीं और उनसे रस टपक रहा था। आंटी बिस्तर पर लेट गईं। टाँगें फैला दीं। “राहुल… आ बेटा… अपनी आंटी की चूत चूस। मैं बहुत दिनों से ये चाह रही थी। तू मुझे चूस… मैं तुझे सब कुछ दूँगी।“ मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया। उनकी चूत के पास मुँह ले जाकर मैंने पहली बार सूँघा। एक मीठी सी महक थी।

मैंने जीभ निकालकर उनकी चूत की लिप्स पर फेरा। आंटी काँप उठीं। “हाँ बेटा… यहीं… चूस मुझे… अपनी जीभ अंदर डाल मैंने उनकी चूत को पूरी तरह चाटना शुरू कर दिया। ऊपर से नीचे तक जीभ घुमाता, फिर क्लिटोरिस को चूसता। आंटी की कमर उठ रही थी।

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“आह… राहुल… कितना अच्छा चूसता है तू… मम्मी की सहेली की चूत चूस रहा है… हाँ… और जोर से… अंदर जीभ डाल उनके रस का स्वाद मीठा और थोड़ा खारा था। मैं लगातार चूसता रहा। आंटी के हाथ मेरे बालों में थे। वो मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं। उनकी सांसें बहुत तेज हो गईं।

“राहुल… मैं… मैं आने वाली हूँ… चूसते रह… हाँ… आह… आ गया।“ आंटी का पूरा शरीर काँप उठा। उनकी चूत से गर्म रस निकला और मेरे मुँह में भर गया। मैंने सब पी लिया। आंटी कुछ देर तक कराहती रहीं। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींचा और जोर से किस किया। “मेरा बेटा… कितना अच्छा चुसवाया तूने… मैं पहले कभी इतना मजा नहीं आई थी।

अब आंटी ने मुझे लेटाया। उन्होंने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया (सुरक्षित रहने के लिए) और खुद ऊपर बैठ गईं। उनकी चूत मेरे लंड पर धीरे-धीरे बैठी। “आह… कितना मोटा है… पूरी तरह भर गया…” उन्होंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। उनकी छातियाँ उछल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर चूसा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

हम दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह महसूस कर रहे थे। आंटी की चूत बहुत टाइट और गर्म थी। वो ऊपर-नीचे हो रही थीं। कभी तेज, कभी धीरे। “राहुल… तेरा लंड मेरी चूत में कितना अच्छा लग रहा है… हाँ बेटा… चोद अपनी आंटी को…” कुछ देर बाद मैंने उन्हें कुत्ते की स्टाइल में चोदा। उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाए। आंटी चीख रही थीं, लेकिन खुशी की चीखें।

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“हाँ… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दे… आह… आखिर में हम दोनों साथ ही झड़ गए। मैंने उनके अंदर छोड़ा (कंडोम के अंदर)। हम दोनों पसीने से तर थे। आंटी मुझे गले लगाकर लेट गईं। “राहुल… आज तूने मुझे बहुत खुशी दी। मैं तेरी हूँ। जब भी तू चाहे, मुझे बुलाना। मैं तेरी चूत चुसवाऊँगी, तू मुझे चोदना।” उसके बाद हम दोनों नहाए। फिर आंटी ने खाना बनाया। खाते समय वो मेरे पैर पर अपना पैर रखकर खेल रही थीं। रात को मम्मी आने से पहले हमने एक बार फिर से सेक्स किया। इस बार मैंने उनकी चूत को बहुत देर तक चूसा।

आंटी दो बार झड़ चुकी थीं। अब हर हफ्ते जब मम्मी बाहर जाती हैं, आंटी आ जाती हैं। और हर बार वो मुझे अपनी चूत चुसवाती हैं। मैं उनकी चूत को चूसता हूँ, वो मेरे लंड को चूसती हैं। हम दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह संतुष्ट करते हैं। ये कहानी मेरी और मम्मी की सहेली आंटी की है। जो शुरू हुई थी एक साधारण दोस्ती से, वो अब एक गहरे और सेक्सी रिश्ते में बदल चुकी है। आंटी कहती हैं, “राहुल, तू मेरी जिंदगी में नई रोशनी लाया है।” और मैं कहता हूँ, “आंटी, आपकी चूत चूसना मेरे लिए सबसे बड़ा सुख है।”

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