Increase Sex Timing – सेक्स में माइंड कण्ट्रोल से टाइमिंग बढ़ा

Increase Sex Timing

तब मेरी उम्र 18 साल की थी, +2 कर रहा था। हमारा घर और विजय अंकल का घर 5 मिनट चलने की दूरी पर था। रात को हमारी पढ़ाई उधर होती थी। उधर विजय अंकल की एक बहन टीचर थी, उनकी शादी हुई थी, हसबैंड मिलिट्री में थे। स्कूल नजदीक करके इधर रहते थे। हमारी पढ़ाई में बहुत मदद मिलती थी। Increase Sex Timing

उसी बीच विजय अंकल की शादी मैरी आंटी से हुई, 24 साल, 5’6”, 36-30-38 साइज, (मास्टर डिग्री होल्डर इन साइटोलॉजी) गेहुंआ रंग, एकदम जूसी वॉटर मेलन्स। हमें बहुत प्यार करती थीं और हम भी उनका बहुत सम्मान करते थे। शादी के करीब 4/5 महीनों में मैरी आंटी और टीचर आंटी के बीच कुछ कह-पकड़ हुई, मैरी आंटी उनकी घर वापस चली गईं।

विजय अंकल एकदम चिंता में पड़ गए, एक तो उनकी मम्मी से डर के बहन को कुछ डाँट नहीं पाए और बीवी को डाँट भी न पाई। उनका सारा हाल मुझसे शेयर करके खुद को शांत करते थे। उन लोगों के हालत देखके मैंने उन लोगों की मदद करने की तैयारी की।

उसके मुताबिक मैं अंकल की तरफ से मैरी आंटी के घर पहुँच गया। 18 साल की उम्र में भी स्कूल की रेगुलर एथलेटिक होने से मजबूत बॉडी थी, और छोटू लाल का साइज भी कुछ कम नहीं था। हाफ पैंट के साइड से जब भी मौका मिलता ही छोटू बार-बार हवा खाने सिर बाहर करता था।

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पहले भी कई बार मैरी आंटी हमें इसके बारे में मजाक करती थीं। आंटी के बिना अंकल का बुरा हालत आंटी को समझाते हुए, क्या हुआ पता नहीं, बातें-बातें में छोटू नींद से जाग गया था। आंटी वो सब देख रही थीं। पूरी बात सुनकर वो थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गईं।

आंटी बोलीं कि, तुम्हारी बात सब ठीक, तुम मेरी कसम, तुम मुझे बहुत प्यारे हो, और जो तुम कहो, मैं मानने की तैयार हूँ। अभी तुम्हारे साथ मैं घर आती हूँ, लेकिन तुम मुझे एक वादा करना होगा कि, अभी से मेरा तुम्हारा एक अनोखा रिलेशन जारी रखना पड़ेगा, जो भले कोई कुछ भी कहे, हमें कुछ परवाह नहीं होनी चाहिए… क्या ठीक है?

मुझे कुछ समझ में नहीं आया, कि मैं एकदम चिंता में हूँ। आंटी जल्दी बोलीं कि, तुम क्या सोच रहे हो, इससे चिंता की कोई बात नहीं यार। मुझे तुम्हारी कुछ मदद चाहिए, तुम मेरे प्यारे लालबेट्टा हो, और कल भी रहेगा, रहना ही चाहिए। तुम अभी बच्चा नहीं रहे, बड़ा आदमी बन चुके हो।

तुम्हारा ड्रेस कोड बदलना ही पड़ेगा, देखो, हाफ पैंट तो फुल पैंट में ही करना पड़ेगा। यकीन न आए तो खुद ही मुंडी नीचे करके देख लो, तुम अभी बच्चा नहीं रहे, बड़ा आदमी बन चुके हो। मैं नीचे देखा और छोटू का हालत महसूस किया और बहुत शर्मिंदा हो गया, दोनों हाथ से छुपाने की कोशिश की, आंटी मेरी नाकामयाबी से हँस पड़ीं।

खाना खाने के बाद हम दोनों आंटी के घर से निकले और रास्ते में चर्च होकर, बांजू वाली बगीचे में जाकर आराम से बैठ गए। आंटी बोलीं हम शाम तक घर जाएँगे, कुछ गुपचुप करेंगे। बातें-बातें में आंटी पूछताछ की, लालबेट्टा तुम्हें तुम्हारे अंकल के बारे में क्या-क्या पता है? मैं बोला कि अंकल जब भी मिलते वो दिल की बात खुलम-खुल्ला मुझसे करते हैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

आंटी बोलीं, ओह नहीं रे, अंकल के सेक्शुअल एक्टिविटीज के बारे में कुछ पता है या क्या नहीं…? आंटी बोलीं कि, तुम्हारे अंकल को हर टाइम मुझे चोदना चाहिए, आगे-पीछे कुछ नहीं देखते, जैसे मूड आते सीधा अंदर डाल देते, कितने हैं, आजू-बाजू में कोई है क्या, कुछ परवाह नहीं करते। फिर भी अंदर डालके 2 या 3 धक्का, बस खत्म, कभी चूत के छेद पर ही झड़ जाता।

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(इसे फास्ट चुदाई सर्विस कहते हैं, कई बार किचन में भी हुई। 1-2 बार ननद ने देखी, उसी बात मन में रखके उसने पक्कड़ की जगह मेरे से की और मुझे बहुत सारी गालियाँ भी दीं, सब सुनकर तुम्हारे अंकल चुप रहे। अब मैं उन्हें बराबर कर दूँगी।  उसके पहले तुम्हारे अंकल की आदत बदलनी ही पड़ेगी।

इसलिए तुम्हारी मदद चाहिए, बीच में तुम्हारी भी ट्रेनिंग होगी, क्योंकि जब तुम्हारी शादी हो जाए, तुम्हारी बीवी कभी इस बात में निराश न हो।  चुदाई करते वक्त अपना मन स्वस्थ रखने में ही देर झड़ सकता है, वगैरह छोटी-मोटी बातो से मुझे उनके कब्जे में ले लिया।

शाम तक हम घर पहुँच गए। दुकान से रात आए अंकल आंटी को देख बहुत खुश हुए। खाने के बाद सीधे उन्हें लेकर बेडरूम चले और दरवाजा लॉक किया। टीचर और ग्रैंडमा भी गुस्से में कुछ बड़बड़ाकर बाकी का काम खत्म किया। दूसरे दिन आंटी मुझे बुलाकर पिछले दिन रात वाली रनिंग कमेंट्री दी। क्या हुआ पता नहीं एक हफ्ते के अंदर टीचर आंटी उनकी ससुराल हमेशा के लिए चली गईं, और हमारी ट्रेनिंग आसान हुई।

मेरा ट्रेनिंग का पहला चैप्टर रहा “स्त्री-पुरुष संभोग के वक्त, आदमियों को शीघ्र स्खलन सर्वसाधारण होता है, वो भी पुरुष का माइंड नियंत्रण में लेकर बदल कर सकते हैं। जब भी संभोग करते समय अपना माइंड शांत रहे और विचार अपना नियंत्रण में रह सके सब ठीक हो जाता है, इसमें कहते हैं ‘संभोग में मानसिक नियंत्रण’ (‘माइंड कंट्रोल थेरेपी इन सेक्स’)।

स्त्री और पुरुष (पति/पत्नी) काम क्रीड़ा करते वक्त घरवाले किसी को पता चलता है क्या, जैसे बड़े फैमिली में कई ऐसे बात बन जाते। वो आदमी का मानसिक अवस्था कुछ अलग हो जाती है कि चुपके-चुपके किसी वेश्या के साथ संबंध रखते जैसे होते और जल्दी-जल्दी 2-4 शॉट मार के पानी छोड़ के चले जाते।

कभी वो आदमी अपना पार्टनर औरत की हालत ध्यान में नहीं लेते। जैसे संभोग में जब औरत गरम हो जाती तब आदमी खत्म होकर सो जाते। वो औरत जिंदगी भर ना-खुश रहती, धीरे-धीरे समाज में पर-पुरुष संबंध फैल जाते। आजकल के जमाने की ‘वाइफ/हसबैंड स्वैपिंग’ फैशन हो गई, उसके ज्यादा प्रोत्साहन होते रहेंगे।

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जब भी औरतों से चुदाई के पहले, उन्हें जोश में आने देना बहुत जरूरी है। वो भी 1स्ट बूब मालिश, नेवल लिकिंग, निप्पल चूसना, चूत अच्छी तरह से मालिश, लिकिंग, सकिंग, फिंगर फकिंग, आदि से वो हॉट हो जाते, ऐसा आपस में करे, आदमी की प्री-कम, चुदाई के पहले बार निकाल ही देना जरूरी पड़ता है।

फिर दोनों एकदम जोश में तैयारी होने बाद धीरे-धीरे औरत ही बूब्स दबाकर, लिप्स किस करके, निप्पल चूसते ही अंदर डाल देना और आराम के साथ अंदर-बाहर स्ट्रोक मारो, वो भी स्लोली फिर स्पीड बढ़ाओ। जब अगर बीच झड़ने की सिचुएशन महसूस हो तो, तुरंत स्ट्रोक मारते ही हमारे मन का कंट्रोल करे कोई अलग सब्जेक्ट के ऊपर ध्यान बदलें.

(यानी कि आज बस क्यों देरी हुई, रोड क्रॉस करते समय किसी को हेल्प की, किसी की आसपास की जगह, आदि। नॉन-इरोटिक सब्जेक्ट ध्यान में लेना चाहिए) झड़ने मूड बदलते फिर से चुदाई जारी रहना, फिर झड़ने वाली मूड लगे तो रिपीट द सेम माइंड-कंट्रोल थेरेपी, कम से कम 4-5 बार रिपीट, ऑटोमैटिकली हम चुदाई का मजा एंजॉय कर सकते और दोनों की संतुष्टि में मास्टर बन सकते। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पहले-पहले 4-5 बार कंट्रोल नहीं हो सकता लेकिन कंटिन्यू प्रैक्टिस, डेफिनेटली हम गोल अचीव कर सकते। एक महत्वपूर्ण बात ये है कि, संभोग से पहले पुरुष (भले पति या कोई) पत्नी (औरत) से पता करना चाहिए कि वो आज संभोग के लिए मानसिक रूप से तैयार है या नहीं। अगर वो इसी मूड में नहीं है तो, उन्हें शांति से समझा देना और चुदाई के लिए मूड मनाना जरूरी है।

अगर औरत फिर भी न तैयार रहे, उन्हें अपनी हालत प्यार से समझा देना, वो माने तब चुदाई चालू रहना। कभी जबरदस्ती मत करना, उसमें चुदाई बोर हो जाती कुछ मजा नहीं मिलता, उसके अलावा धीरे-धीरे औरत/आदमी इसी चुदाई से नफरत हो जाएगी। ऐसा नहीं करना जैसे तुम्हारे अंकल जैसे कपड़ा निकालते ही तुरंत अंदर डाल देते डबल स्पीड में पानी छोड़कर खत्म होते।

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और ये भी है, कौन सी स्टाइल में चुदाई एंजॉय ज्यादा मिलते वही स्टाइल पहले प्रिफर करना चाहिए। पार्टनर की इच्छा के अनुसार संभोग करो, मैक्सिमम मजा अपने आप हो जाता है। कई औरतों को माउथ फकिंग एलर्जी होता है, कभी उल्टी करतीं, जो लोग मुँह फकिंग के बारे में बिन जानकारी से ही ऐसा हो जाता।

ब्लो जॉब/मुँह में लेकर चूसने में क्या मजा आता, उनके बारे में अच्छी तरह से समझाया देना चाहिए। एक बार असली मजा एंजॉय कर दिया, वो औरत लंड अपनी चूत पर लेने से ज्यादा मुँह में ले लेंगी। औरत तैयार है तो फटाफट उनकी कपड़े एक झटके में उतारो मत, पहले कपड़ों के ऊपर से ही प्यार से बूब्स दबाओ.

निप्पल ढूंढ के ले लेना, पेट और नेवल हल्का सा मालिश करना, पेटीकोट/पैंटी से चूत धीरे दबाना, आराम से एक-एक करके उतार के प्यार से मालिश करो, चूस लो, लिक/सक करके मैक्सिमम मजा करो फिर आराम के साथ ब्रा निकालो मलाई मार के मालिश करो निप्पल मुँह में लेकर हल्का सा काटो, चूसो, औरत को खुजली बना दो, नीचे अपना आप गीली होने दो.

साथ-साथ नीचे हाथ डालकर उंगली डालो, क्लिटोरिस प्यार से खींच लो, एक-एक करके 2-3 उंगलियों से चोदो, चोदकर उसकी प्री-कम बार निकालो। जैसे आदमी का लंड हाथ में लेकर उसका सुपाड़ा आगे-पीछे करके शाफ्ट मालिश करो, मुँह में डालके हल्का सा दाँत लगाकर चूस लो।

जब तक स्त्री और पुरुष उनके प्री-कम बाहर निकलते ही समझ लो दोनों असली लंड-चूत क्रीड़ा शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हुई। पुरुष लंड प्री-कम निकालते फिर उसे मुँह में डालकर लोहे की तरह कड़क बनाकर, चूत में डाल दो, एकदम मजा आएगा साथ-साथ उसमें निकलते स्पर्म एकदम मजबूत रहेंगे, वो बीज औरत की कोख के अंदर गिरते, औरत गर्भवती बन जाने का चांस रहता है।

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अब जितना हो सके समय बढ़ाकर मजा मारो। एक बार औरत चुदाई में सैटिस्फाई हुई, फिर जिंदगी भर याद रहेगी। एक बार स्वाद अनुभव किया, फिर मौके पर खुद तैयार रहेगी। जब आदमी/औरत चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार होने से पहले जो छोड़ देते, और जल्दी झड़ जाते उन लोगों की स्पर्म 50% से ज्यादा निर्वीर्य रहते और स्त्री गर्भवती बनने की संभावना बहुत कम रहती…

जैसे स्त्री बीज में हमेशा केवल 1 ही लाइव-बीज रहता और पुरुष स्पर्म में 1000 से ऊपर लाइव-बीज होते। जैसे चुदाई से स्त्री की कोख में पैदा होते 1 लाइव बीज, पुरुष लंड से डिस्चार्ज होते 1000 लाइव-बीज में से 1 के साथ मिक्सअप होता है। स्त्री की कोख भर जाती, बच्चा बन जाता।

बिना तैयारी से चुदाई कितनी भी करो, स्त्री गर्भवती बनने में फेल होती, नतीजा दिन में बार बिना तैयार के साथ चोदो, फिर भी इस औरत के कोख हमेशा खाली रह जाते। स्त्री में उसकी पीरियड्स (मासिक चक्र) रहता। नॉर्मली 23 से लेकर 25 दिनों तक रहता। कई औरतों में उनके फिजिकल स्टेटस के डिपेंड करके आगे-पीछे हो जाते। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जब औरत की एम.सी. शुरू होते दिनों में उनकी कोख के अंदर जमा हुआ ओल्ड बीज (जो पुरुष बीज से मिक्स नहीं पाया) को बाहर फेंक देते। कोख एकदम क्लीन होने से 5-6 दिनों से स्त्री कोख के अंदर हर रोज 1-1 लाइव-बीज पैदा हो जाते और उसकी जीवन केवल 24 घंटे रहता। उस टाइम के अंदर कोई 1 पुरुष लाइव-बीज से मिक्स हो जाता, तभी स्त्री की कोख में बच्चा बन जाता।

जैसे स्त्री कोख एम.सी. क्लियर होने से 5वें दिन से लेकर दिन तक रोज 1-1 लाइव बीज हो जाते। 16वें दिन से लेकर अगले एम.सी. के टाइम तक कितना बार भी चाहे कितने पुरुषों के साथ भी चुदाई करो कुछ गड़बड़ नहीं होती। इसे टाइम को सेक्स में सेफ पीरियड्स (सुरक्षा समय) कहा जाता।

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आंटी मुझे खाली इंस्ट्रक्ट नहीं किया, अंकल की परमिशन के साथ प्रैक्टिकल करती थी। जैसे हम काम क्रीड़ा करते वक्त अंकल के लिए डेमॉन्स्ट्रेशन भी हो जाती थी। बीच में कई नई-नई तरीकों से भी चुदाई करती रही, कितना बदलाव चाहिए वो टाइम टू टाइम करती रही। एक कोई 2 महीनों बाद, आंटी हमारे बीच टेस्ट कर दी। अंकल धीरे-धीरे प्रोग्रेस हो गई, करीब 6 महीने में कुछ ‘डी’ ग्रेड हाजिर की। मुझे केवल 2 महीने से ही ‘ए+’ प्रदान की। आंटी अंकल से हमेशा बोलती थीं कि

‘लालबेट्टा मेरे बेस्ट स्टूडेंट रहे, और हमेशा ‘काम क्रीड़ा’/चुदाई में मेरा नाम रोशन करेगा। असली में मैरी आंटी 4 बच्चों को जन्म दी, उसमें से 3 अंकल क्लेम कर सकते, 1 पर मेरा निशानी लगे हुए थे। चर्च में बैप्टिज्म के लिए आंटी/अंकल के अनुसार वो बच्चे का गॉड फादर भी मुझे बनना पड़ा। कभी-कभी हम थ्रीसम करते वक्त अंकल हरे वा..वा करते रहे। जैसे मौका मिलते हम अभी भी एंजॉय करते रहते। (आजकल बच्चे सब बड़े हो गए, आंटी उनके सामने बड़े डीसेंट रहतीं। फिर भी मेरे साथ मौके के बेकार होने नहीं देतीं।)

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