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College Girl Hard XXX – एक मजबूर लड़की की दुखभरी सेक्सी कहानी

College Girl Hard XXX

यह कहानी एक लड़की रौशनी की है, जो मेरे साथ ही मेरे क्लास में पढ़ती थी। वह बहुत दुखी रहती थी और हमेशा थकी-थकी सी रहती थी, जैसे कोई रात भर सेक्स करके थक गया हो। एक दिन मैंने उससे प्यार से दो बात की और अपनी बातों में फँसाकर उससे पूछ ही लिया कि उसे क्या दुख है, जो वह इतनी दुखी रहती है। उसने भी न जाने मुझमें क्या देखा कि मुझे अपना सब कुछ बताने लगी। College Girl Hard XXX

एक लड़का टिंकू है, जो मेरे ट्यूशन में मेरे साथ पढ़ता था। ट्यूशन में साथ पढ़ते हुए कुछ महीनों बाद उसने मुझे प्रपोज किया। वह बहुत अच्छा था, इसलिए मैं उसे मना नहीं कर पाई और हम फिर रोज ट्यूशन के बाद घूमने जाने लगे। मुझे वह और भी अच्छा लगने लगा और मेरा उससे रोज-रोज मिलने का मन ज्यादा से ज्यादा करने लगा।

अगर एक भी दिन मैं उससे न मिलती तो मुझे ऐसा लगता था जैसे कई दिन हो गए हैं मुझे उससे मिले बिना। इसलिए मैं उससे ज्यादा से ज्यादा मिलने लगी। जब भी वह मुझे कहीं जाने को कहता, मैं उसके बुलाए हुए जगह चली जाती और उसके साथ अपना समय बिताती।

धीरे-धीरे हम दोनों बात करते-करते इतने फ्रैंक हो गए एक-दूसरे से कि हम एक-दूसरे से खुल्लमखुल्ला सेक्स की बातें भी शेयर करने लगे। मुझे उससे बात करना बहुत अच्छा लगता था और शायद उसे भी। हम अक्सर सेक्स की बातें एक-दूसरे से करने लगे और पता नहीं कब मुझे सेक्स की बातें करना बहुत अच्छा लगने लगा।

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जब भी मैं उससे सेक्स की बातें करती तो मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरे पूरे शरीर में कुछ-कुछ हो रहा है। मैं उससे सेक्स की बातें करने में और भी ज्यादा इंटरेस्ट दिखाने लगी। फिर एक दिन उसका जन्मदिन था और दोपहर को उसका फोन आया कि वह मुझसे मिलना चाहता है।

मैं जल्दी से तैयार हुई और अपने ट्यूशन की कॉपी व किताब उठाकर मम्मी को बोलकर कि ट्यूशन में टेस्ट है, टिंकू के बताए स्थान पर चली गई। उस दिन वह अपनी हुंडई वेरना गाड़ी में आया हुआ था। हम दोनों उसकी जन्मदिन ट्रीट के लिए एक होटल में लंच करने गए। वापस आते हुए उसने गाड़ी एक ऐसे रास्ते के बीच में पार्क कर दी जहाँ कोई भी आता-जाता नहीं था।

उसने मुझसे कहा, “रौशनी, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।” और मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया। मैं भी उसे मना नहीं कर सकी। जैसे ही उसने मेरा हाथ पकड़ा, मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर वह बात करता हुआ धीरे-धीरे मेरे पूरे बदन पर हाथ फेर चुका था।

पहले तो मैं उसकी बात पर ध्यान देते हुए उसके हाथ के बारे में ध्यान नहीं दिया। फिर मुझे महसूस हुआ कि कुछ मेरे पूरे बदन पर बार-बार चल रहा है। तो मैंने टिंकू से कहा, “ये क्या कर रहे हो?” वैसे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, लेकिन फिर भी मैं उसे दिखाने के लिए मना कर रही थी।

फिर टिंकू ने कहा, “रौशनी, मैं अपने बर्थडे गिफ्ट तुमसे माँगना चाहता हूँ। क्या तुम दोगी?”

मैंने कहा, “हाँ, दूँगी। माँगो तो।”

टिंकू ने कहा, “मेरी कसम खाकर मना नहीं करोगी और वैसे भी अगर तुम मुझे सच्चा प्यार करती हो और मुझपर तुम्हें विश्वास है तो तुम बिल्कुल भी मना नहीं करोगी।”

मैंने कहा, “ठीक है, मैं बिल्कुल भी मना नहीं करूँगी। तुम माँगो।”

टिंकू ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “रौशनी, मैं तुम्हें बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ। मैं तुम्हारी सुंदरता को करीब से देखना चाहता हूँ। प्लीज मना मत करना।”

और मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था कि मैं भी मना नहीं कर पाई और मैंने हाँ कह दिया। फिर उसने मेरे टॉप और जींस एक-एक करके उतार दी। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में उसके सामने थी। तो उसने मेरी ब्रा भी उतार दी और बड़े ध्यान से मुझे देखने लगा।

उसने अपने मोबाइल से मेरी तस्वीरें भी लीं। मुझे नहीं पता था कि जो वह सब कर रहा था, वह सब कार के पीछे वाले मिरर में लगे वीडियो कैमरे में रिकॉर्ड हो रहा था। फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए, अपनी फ्रेंची छोड़कर।

मैंने कहा, “ये क्या कर रहे हो? तुमने तो सिर्फ मेरा बदन देखने को कहा था। अब अपने कपड़े क्यों उतार दिए?”

उसने कहा, “मैं तुम्हारे साथ नाइंसाफी नहीं करना चाहता। तुम बिना कपड़ों के और मैं कपड़ों में अच्छा नहीं लगता।”

मैंने उसकी फ्रेंची की तरफ देखा तो उसका लंड बहुत बड़ा था और पूरा खड़ा हुआ था, जैसे वह चोदने के लिए पूरी तरह तैयार हो। फिर वह धीरे से मेरे पास आया और मेरे हाथ पर किस करता-करता कब मेरे मुँह तक और फिर कब मेरे होंठों तक पहुँचा, पता ही नहीं चला। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मेरा बदन भी गर्म होता जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मेरी चूत में तो मानो चींटियाँ रेंग रही हों। किस करते-करते कब उसके हाथ मेरे बूब्स तक चला गया, मुझे तो यह भी पता नहीं चला। वह मेरे बूब्स को और तेज-तेज दबाने लगा और मुझे भी ज्यादा मज़ा आने लगा। अब तो मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी। उसने एक बार मेरे पूरे बदन पर किस कर चुका था और मेरी चुदास बढ़ती ही जा रही थी। मेरे मुँह से अब तो सिसकियाँ निकलने लगी थीं — “आह्ह्ह्ह्ह… श्श्श्श्श…”

उसने अब मेरी पैंटी भी निकाल दी और अपने जीभ से मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से सिसकियों के साथ-साथ अब गालियाँ भी निकल रही थीं — “डाल बहनचोद… डाल मेरी चूत में… अपने सारी जीभ घुसा दे… चोद मुझे अपने जीभ से ही चोद दे मादरचोद… चोद मुझे… आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह…”

और मैं अब अपने एक हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी। 10 मिनट तक उसने मेरी चूत को खूब मन लगाकर अपनी जीभ से चोदा। फिर उसने कहा कि मैं भी उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसूँ। मैंने उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। उसका लंड तो 7 इंच के करीब का था।

मेरे मुँह में भी नहीं आ रहा था, फिर भी मैंने मैनेज करके उसके लंड को कम से कम 10 मिनट तक चूसा। फिर उसने मुझे कार की सीट पर लिटा दिया और कहा कि मैं अपनी पूरी टाँगें खोल लूँ ताकि लंड को अंदर जाने में कोई समस्या न हो। फिर उसने कार के डैशबोर्ड से वैसीलीन की क्रीम निकालकर मेरी चूत पर लगा दी और अपना धड़कता हुआ लंड मेरी चूत के ऊपर रखकर आगे-पीछे करने लगा।

और फिर जो उसने एक दम मेरी चूत में अपना लंड डाला तो मेरी चूत तो मानो फट ही गई हो। एक ही झटके में उसके आधा लंड मेरी चूत में चला गया था और मैं दर्द के मारे वहाँ तड़पने लगी। मैं चिल्ला उठी — “बहनचोद… मेरी चूत फाड़ दे तूने तो…!!!! निकाल अपना लंड मेरी चूत से!!”

फिर उसने धीरे से अपना लंड निकाला तो मेरी चूत से खून निकलने लगा और मैं डर गई। मैंने उसे सुनानी शुरू की और कहा, “बहनचोद तूने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली, अब क्या होगा?”

फिर टिंकू बड़ी आराम से बोला, “जान, मुझे कुछ करने तो दे।” और ऐसा कहकर उसने मेरे बूब्स को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मुझे अच्छा लगने लगा। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर लगाकर जो धक्का मारा तो मेरी तो जान ही निकल गई जब उसका पूरा लंड मेरी चूत में चला गया।

मैं और जोर से चिल्ला उठी। उसने फिर से मेरे बूब्स को जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया और मुझे कुछ रिलीफ मिलने लगा। थोड़ी देर बाद सब कुछ ठीक सा लगने लगा और मुझे पूरा-पूरा मज़ा आने लगा अपने चूत चुदवाने में। फिर टिंकू ने मेरी चूत में अपने लंबे लंड के 15-20 शॉट्स और लगाए, जो कि बहुत ही जोरदार थे।

मैं उसकी छाती से लगकर झड़ गई। लेकिन टिंकू तो लगा ही हुआ था। मेरे झड़ने के बाद भी मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलना बंद नहीं हुई थीं — “श्श्श्श्श… आह्ह्ह्ह्ह… ओह टिंकू मेरे जान… चोदो और जोर-जोर से चोदो मुझे… आज मेरी चूत फाड़ ही दो… वहाँ… वहाँ…”

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और फिर 5 मिनट बाद ही टिंकू कुछ जोरदार शॉट्स लगाकर मेरी चूत में ही झड़ गया। उस समय मैं तो जैसे जन्नत में थी। फिर हमने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वहाँ से चलकर कमला नगर वाले मैकडॉनल्ड्स में जाकर बैठ गए और कोल्ड ड्रिंक पीकर घर चले गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

घर जाकर मुझे बहुत एक्साइटमेंट भी थी और डर भी लग रहा था कि कहीं कुछ हो न जाए। और फिर मुझे याद आया कि टिंकू ने तो मेरी फोटो भी ली थीं। कहीं वह उनका गलत फायदा तो नहीं उठाएगा? लेकिन मुझे टिंकू पर पूरा भरोसा था कि वह ऐसा नहीं करेगा।

फिर मैं रात को सोते हुए यही सोच रही थी कि चाहे कुछ भी हो, आज चूत मरवाने में तो मुझे बहुत ही मज़ा आया। अब मुझे पता चला कि सबको सेक्स करना इतना अच्छा क्यों लगता है। और मैं फिर अगले दिन वेट करने लगी कि कब टिंकू मुझे बुलाए और मेरी फिर से चूत मारे। मुझे तो मानो चूत मरवाने का नशा सा हो गया हो एक बार चूत मरवाकर।

फिर टिंकू का फोन आया। उसने मुझे अपने घर पर बुलाया था। उसके घर वाले कहीं गए हुए थे जो कि रात को ही वापस आने वाले थे। मैं जल्दी से उसके घर चली गई। वहाँ पहुँचते ही टिंकू ने घर का गेट बंद करके मुझे पीछे से पकड़कर अपने बेड पर फेंक दिया और मेरे ऊपर लेटकर बिना रुके मेरे किस लेने लगा। मानो वह पागल हो गया हो।

“ओहोहोह मेरे जान रौशनी!!! आई लव यू!!! आई लव यू……!!!! जान!!!!!!! मुमुमुम्म्ह आह्ह्ह्ह्ह…”

मैंने कहा, “चोदो टिंकू अरे भी मैं पहले बार तुम्हारे घर आई हूँ, कम से कम पानी तो पिला दो या आते ही सेक्स करने की लगे हुए हो???”

फिर टिंकू मेरे लिए एक काँच के ग्लास में पानी ले आया। मैंने पानी पिया और फिर जाकर बेड पर लेट गई। मैंने बेड की साइड में रखी हुई किताब ड्रॉअर की सबसे ऊपर वाली किताब उठाकर पढ़ना शुरू किया तो उस किताब में से सेक्स करते हुए लड़की की कई सारी फोटोज दिखीं। उन्हें देखकर फिर से मेरी चूत में से पानी छूट गया और मेरा चूत में टिंकू का लंड लेने का मन कर गया।

फिर टिंकू के आते ही उसने वो किताब मेरे हाथ से लेकर साइड में रख दी और कहा, “और रौशनी जान, क्या हम आज भी सेक्स कर सकते हैं क्या???”

मैंने शर्माते हुए टिंकू से कहा, “टिंकू अब मैं तो तुम्हारी ही हूँ, जो तुम कहोगे मैं वही करूँगी!!!!!!”

टिंकू ने कहा, “सच? तुम वही करोगी जो मैं कहूँगा???”

मैंने कहा, “हाँ, मैं वही करूँगी।”

फिर टिंकू ने धीरे से मेरे कान में कहा कि वह मेरी गांड मारना चाहता है। तो मैं एक मिनट के लिए तो चुप हो गई। फिर मैंने कहा, “कल चूत मारी थी तो अभी तक ढंग से दर्द खत्म नहीं हुआ जो कि तुम्हारे 7 इंच के लंड के अंदर जाने के बाद हुआ था और आज तुम गांड मारने के लिए कह रहे हो। आज तो मेरी गांड बस फट ही जाएगी। उसमें तुम्हारा ये इतना बड़ा लंड कैसे जाएगा??? नहीं बाबा नहीं!!!!”

फिर टिंकू ने कहा, “क्या तुम्हें मेरे ऊपर विश्वास नहीं है?”

मैंने कहा, “हाँ है तो!!!”

टिंकू ने कहा, “तो फिर क्या डर है??? चलो आज तुम्हें जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारो!!”

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तो मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगी होकर टिंकू के सामने लेट गई। टिंकू भी मेरे सामने नंगा लेटा हुआ था। फिर टिंकू ने अपना लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया। लगभग सारा लंड मेरे मुँह में जा चुका था। वह मेरे हलक को छू रहा था। मेरे साँस बंद होने वाले थे।

 बस फिर उसने मेरे मुँह से अपना लंड निकाल दिया और मुझे कहा कि मैं अपनी गांड में खुद ही ड्रॉअर में पड़ी क्रीम लगा लूँ ताकि गांड मरवाते हुए दर्द न हो। मैं वहाँ गई और क्रीम का बॉक्स उठाकर ले आई और टिंकू को कहने लगी, “ये लो, तुम्हें लगा दो मेरी गांड में क्रीम।”

और मैं फिर टिंकू के मुँह की तरफ अपनी गांड को खोलकर कुत्ते वाली पोजीशन में खड़े हो गई, जैसा कि उस किताब में उस लड़की ने बताया हुआ था। फिर टिंकू ने कितनी सारी क्रीम लेकर मेरी गांड में लगा दी और अपने लंड पर सरसों का तेल लगा लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

और अपना लंड मेरी गांड के मुँह पर रखकर धीरे से अंदर डाला। इतनी सारी क्रीम और उसके लंड पर लगे तेल की वजह से लंड सटाक से मेरी गांड में चला गया। मुझे ऐसा लगा कि मानो कोई बहुत बड़ा दंडा मेरी गांड में जो कि बहुत गर्म है, डाल दिया हो। मेरी गांड में तो जैसे ज्वालामुखी फूट गया हो।

मैंने जोर से चिल्लाकर टिंकू को कहा, “बहन के लौड़े!!! मेरी गांड फाड़ेगा क्या??? निकाल बाहर अपना लंड!!! बहनचोद तेरी माँ चुदे, बहन के लौड़े!!!”

फिर उसने पीछे से ही धीरे-धीरे मेरे बूब्स मसलने शुरू किए और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। 10 मिनट बाद तो मुझे भी अच्छा लगने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा। और फिर टिंकू ने 20 मिनट बाद कई जोरदार शॉट्स के बाद सारा अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया।

उसके बाद उसने मुझे सीधा करके मेरे ऊपर लेट गया। कुछ देर बाद उठकर उसने मेरे सारे बदन पर कल की तरह ही किस करना शुरू किया और फिर से मेरी चूत मारी। इस बार उसने मेरे बूब्स की चुदाई की और अपना सारा माल मेरे मुँह में ही छोड़ दिया और मैं भी मजे-मजे में सारा माल पी गई।

फिर भी टिंकू ने मुझे नहीं छोड़ा और शाम को फिर 2 बार मुझे चोदकर ही घर भेजा। उस दिन तो रात को मेरी चूत और गांड में दर्द भी हो रहा था, तो मुझे अपने कमरे में रात को ही अपनी चूत और गांड पर दवाई लगाकर बिना पैंटी और पजामा के अपने दोनों टाँगें फैलाकर सोना पड़ा ताकि दर्द कम हो।

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फिर टिंकू का कई दिनों बाद फोन आया और उसने मुझे अपने दोस्त अरुण के घर पर बुलाया। मैं उस दिन भी चली गई। वहाँ पहुँचकर मैंने देखा कि उसके दो दोस्त अरुण और नवीन पहले से ही मौजूद थे। तो मैंने कहा, “तुमने मुझे यहाँ इन सबके साथ क्यों बुलाया?”

उसने कहा, “तुम्हें कुछ दिखाना है।” और उसने अरुण के कंप्यूटर में एक सीडी लगाई और जैसे ही उसने प्ले किया तो मेरी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे रह गई। उसमें वो सब रिकॉर्डेड था जो हम दोनों ने साथ 2 दिनों के सेक्स सेशन में किया था.

मेरी पहली बार जब सील तोड़ी थी टिंकू ने और जब उसने मेरी गांड भी पहली बार मारी थी। और सब देखने में ऐसा लग रहा था जैसे कि मैंने ही टिंकू को कहा हो वो सब करने के लिए। उस समय मेरे माथे पर से पसीने छूटे जा रहे थे। तो टिंकू ने अपना रूमाल देते हुए कहा, “डरो मत, हम ये सीडी किसी को नहीं दिखाएंगे!!!!”

मैंने कहा, “प्लीज टिंकू ये सीडी किसी को मत दिखाना, नहीं तो मैं किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहूँगी। प्लीज टिंकू मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ।” और मैं टिंकू के सामने ही रोने लगी!!!!

टिंकू ने मुझे चुप कराया और कहा, “तुम दुखी मत हो। हम ये सीडी किसी को नहीं दिखाएंगे लेकिन तुम्हें वो ही करना होगा जो हम तुमसे कहेंगे, ओके?”

मैंने कहा, “जो तुम कहोगे वो मैं करूँगी लेकिन तुम ये सीडी किसी को मत दिखाना प्लीज।”

“ठीक है तो मैं तुम्हारे साथ अभी यहीं सेक्स करना चाहता हूँ — अरुण और नवीन के सामने!!!!”

मैंने कहा, “प्लीज टिंकू ऐसा मत करो। तुम तो मुझे प्यार करते थे, फिर अपने प्यार की नुमाइश ऐसे करोगे क्या???”

मैंने ऐसे ही कई बातें टिंकू से कहीं और उसे बहुत मनाने की कोशिश की तो उसने मुझे गुस्से में कहा, “बहन की लौड़ी, समझ नहीं आता क्या? जो एक बार कह दिया वो कर ले चुपचाप, नहीं तो ये सीडी तेरे ही घरवालों को सबसे पहले दे दूँगा, फिर देख लेना क्या होगा बस!!! चल बहन की लौड़ी, उतार अपने सभी कपड़े जल्दी!! रांड कहीं की, चल जल्दी कर!!” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

और मुझे मजबूरन टिंकू के साथ अरुण और नवीन के सामने सेक्स करना पड़ा। टिंकू के दोस्तों ने उसकी भी रिकॉर्डिंग कर ली थी। और फिर उन्होंने मुझे एक नकली लंड दिया और कहा, “चल एक ऐसे वीडियो बनवा जिसमें तू अकेले ही इस नकली लंड से सेक्स कर रही हो। चल रांड जल्दी कर, हमारे पास टाइम नहीं है।” और फिर मुझे वो सब भी करना पड़ा और उन्होंने उसकी भी वीडियो बना ली।

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फिर तो टिंकू मुझे रोज-रोज ही कहीं न कहीं बुला लेते और मेरे साथ जो भक कर सेक्स करता और चला जाता।

एक दिन उसने मुझे फिर नवीन के घर बुलाया और मुझे कहा, “आज मैं नहीं, अरुण और नवीन तुम्हारे साथ सेक्स करेंगे और जगह बची तो मैं भी कहीं न कहीं अपना लंड डाल ही लूँगा!”

ये सुनकर मेरे तो पैरों के नीचे जैसे जमीन ही न रह गई। और उसने उन दोनों का लंड अपने कपड़े उतारकर एक साथ चूसने को कहा। उनमें से नवीन का लंड तो टिंकू से भी ज्यादा बड़ा था। वह कह रहा था, “जल्दी करो ओह रांड जल्दी!!” मैंने दोनों का लंड चूसा।

अरुण फिर जल्दी ही हटकर मेरी चूत में अपना लंड डालकर अपना माल मेरी चूत में छोड़कर झड़ गया। फिर उस नवीन ने तो मानो मेरी जान ही निकाल दी हो। मेरी चूत बस फटने वाली थी। और फिर उस बहन के लौड़े ने मेरी गांड भी मारी और अपना सारा माल मेरी गांड में न छोड़कर मेरे मुँह में ही छोड़ दिया, जो कि मुझे सारा सटकने को कहा। बस अब ये तीनों हर 2-3 दिन बाद मुझे एक-दूसरे के घर बुलाते और कॉल गर्ल की तरह अपनी मनमानी करके मुझे चोदते — कभी कुत्ते की तरह, कभी किसी और तरह, कभी किसी और तरह।

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