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Summer Vacation Aunty Chudai – पाउडर लगवा कर चुदवाया आंटी ने

Summer Vacation Aunty Chudai

ये मेरी सच्ची कहानी है जब मैं छोटा था, यानी सिर्फ 18 साल का। मेरा बचपन गाँव में गुजरा है। गर्मी की छुट्टियों में मैं गाँव में ही था। हमारे घर से कुछ दूर एक आंटी रहती थीं, जिनके यहाँ एक लड़का था — संजू, वो 5 साल का था। आंटी की उम्र 40 के आसपास होगी और अंकल की उम्र करीब 50 साल। Summer Vacation Aunty Chudai

कहानी उन दिनों की है जब मैं 18 साल का था और मनोरमा आंटी के घर रोज जाता था। मनोरमा आंटी मुझे बहुत लाइक करती थीं। मैं उनको घर का सामान बाजार से लाकर देता था। एक दिन धूप काफी तेज थी और आंटी घर पर अकेली थीं। मैं उनसे मिलने उनके घर गया।

मैं टीवी देख रहा था कि बाजू वाले कमरे से आंटी की आवाज आई। आंटी ने मुझे कमरे में बुलाया और कहा कि उनकी पीठ पर गर्मी से फुंसियाँ हो गई हैं, थोड़ा सा पाउडर लगा दो। मैंने कहा, “ठीक है।” फिर उन्होंने मेरी तरफ अपनी पीठ कर दी और अपना मुँह दीवार की तरफ कर दिया।

उन्होंने अपना ब्लाउज उतारा और एक तरफ कर दिया। आंटी की पीठ एकदम गोरी थी और उन्होंने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी। मैंने पाउडर उनकी पीठ पर लगाना शुरू किया। उन्होंने कहा, “अच्छे तरह से पूरी पीठ पर लगाओ।” मैं पूरी पीठ पर लगा रहा था पर उनकी ब्रा के कारण मेरा हाथ रुक जाता था।

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कुछ देर बाद मैंने देखा कि मेरा लंड खड़ा हो गया है। उस समय मेरा लंड सिर्फ 5 इंच था और मुझे सेक्स के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मैं अंडरवियर भी नहीं पहनता था। पीठ पर पाउडर लगाने के बाद आंटी मेरी ओर पलटीं और मैंने उनके बूब्स देखे जो काफी गोरे थे और ब्लैक ब्रा में फँसे हुए थे।

आंटी पलटीं और मुझे थैंक यू कहा और अपना ब्लाउज पहन लिया। उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी और उन्होंने देख लिया कि मेरा लंड खड़ा हुआ है। वो बस मुस्कुराईं और कुछ नहीं कहा। मैंने अपने हाथ धोए और टीवी देखकर बाद अपना घर चला गया।

दूसरे दिन फिर उनके घर गया तो आंटी ने फिर से कहा कि मुझे फिर से पाउडर लगाना है। मैं खुश हो गया और तुरंत हाँ कर दी। आंटी के कमरे में गया तो आंटी ने आज मुझे देखा और मेरी पैंट की तरफ देखकर मुस्कुरा दीं और कहा, “चलो पाउडर लगाओ।”

आंटी ने फिर से पीठ मेरी ओर करके अपना ब्लाउज खोल दिया। मैं पाउडर लगा रहा था और मेरा हाथ उनकी पीठ पर घूम रहा था पर कल की तरह उनकी ब्रा की बेल्ट मुझे परेशान कर रही थी। मैंने आंटी से कहा कि ये बेल्ट बीच में आती हैं।

इस पर आंटी ने अपने हाथ पीछे करके अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और शोल्डर से अपनी ब्रा निकाल दी और कहा, “अब लगाओ पाउडर।” मैं अब आसानी से पाउडर लगा रहा था। फिर से मेरा लंड तन चुका था। मुझे अच्छा लग रहा था आंटी की पीठ को देखकर।

मैंने पाउडर लगाते समय कई बार उनको बूब्स को भी बाजू से टच किया। फिर आंटी ने कहा, “बस राज, अब बस करो।” फिर आंटी मेरी ओर घूमीं। उनके बूब्स खुले थे और वो भी मेरे चेहरे के एकदम सामने। वाह, क्या बूब्स थे उनके! और उनके निप्पल एकदम पिंक कलर के थे और ऊपर की ओर तने हुए थे।

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आंटी ने मुझे देखा और कहा, “थैंक यू राज।” और अपनी ब्रा पहन ली और ब्लाउज भी। उन्होंने मेरी पैंट की ओर फिर से देखा और हँसकर चुप हो गईं। दूसरे दिन फिर मैं उनके घर चला गया और आंटी से पूछा, “आंटी, क्या पाउडर लगाना है आज भी?” आंटी ने कहा, “हाँ।” और फिर हम लोग उसी कमरे में गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

इस बार आंटी ने खड़े होकर मेरे सामने पहले अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगीं। फिर आंटी ने हाथ पीछे करके अपनी ब्रा के हुक भी खोल दिए और वो मेरे सामने सिर्फ साड़ी में थीं, ऊपर कुछ भी नहीं था। उनके बूब्स कमाल के थे।

उन्होंने कहा, “आज पाउडर सामने भी लगाना है।” कहकर वो अपने बूब्स की ओर दिखाने लगीं। मैं डर गया और कहा, “सामने भी?” तो उन्होंने कहा, “हाँ।” फिर वो मेरे सामने आकर बैठ गईं और पाउडर का डिब्बा देकर कहने लगीं कि इसे लगाओ। मैंने उनके बूब्स पर पाउडर लगाना शुरू किया और उनके निप्पल कल की तरह तन गए। आंटी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं खूब जोर-जोर से पाउडर लगा रहा था।

फिर कुछ देर बाद आंटी ने कहा, “राज अब बस करो, काफी है आज के लिए।” मेरा हाल बुरा था, मेरा लंड पूरा तन चुका था और उनके घुटने को लग गया। वो इसी मौके के इंतजार में थीं। उन्होंने मुझसे पूछा, “ये क्या है?” मैं खामोश रहा। उन्होंने पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़कर कहा, “अरे ये तो बहुत छोटा है, दिखाओ।”

मैं डर गया और कहा, “नहीं।” तो उन्होंने कहा, “दिखाओ।” और कहा, “जब ये खड़ा हो जाए तो इसे आजाद कर देना चाहिए, पैंट में बंद नहीं रखना चाहिए इसे।” कहकर आंटी ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और मेरा लंड अंदर हाथ डालकर बाहर निकाल दिया। और उसे देखकर हँसने लगीं और कहा, “राज बेटा, तुम बड़े हो रहे हो। क्या इसमें से कुछ निकला है अभी तक?”

तो मैंने कहा, “हाँ आंटी, रोज सु-सु निकलती है।” वो हँसने लगीं और मेरे लंड पर से हाथ हटा दिया और उठकर अपनी ब्रा और ब्लाउज पहन लिया। मैं अपने घर आ गया। उस रात को मैंने अपना लंड बहुत दबाया और काफी मुठ मारी। मुझे काफी अच्छा लग रहा था।

उसके बाद वाले दिन मैं सुबह ही आंटी के पास चला गया। घर रोज की तरह वो अकेली ही थीं। फिर मैंने पूछा, “आंटी आज पाउडर नहीं लगाना है?” तो उन्होंने कहा, “नहीं।” मैं एकदम उदास हो गया। पर आंटी ने कहा, “आज तुमसे कुछ और काम है।” मैंने पूछा, “क्या काम है?” तो उन्होंने कहा, “अंदर आओ, बताती हूँ।”

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ये कहकर आंटी मुझे अंदर के रूम में ले गईं और कहा, “आज मुझे मेरी फुद्दी में काफी दर्द हो रहा है। कल तुम्हारे अंकल ने इसे काफी दर्द कर दिया। तुम थोड़ा दबा दो तो आराम हो जाएगा।” ये कहकर आंटी अपने बिस्तर पर लेट गईं और अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा दिया।

मैंने देखा कि आंटी ने ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी है। मैं घबरा गया। पर आंटी थोड़ा ऊपर उठकर अपनी पैंटी नीचे खींच दी और मुझे अपने पास बुलाया। और अपनी फुद्दी की तरफ हाथ बताकर कहने लगीं कि इसमें मुझे आज काफी दर्द है, प्लीज इसे थोड़ा दबा दो।

मैं बेड पर चढ़ गया और उनकी फुद्दी, जो कि क्लीन शेव थी, डरते-डरते दबाने लगा। थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने आंटी से पूछा, “आंटी इसमें दर्द कैसे हुआ?”

तो आंटी ने कहा, “कल तुम्हारे अंकल ने इसे काफी दर्द कर दिया है।” मैंने पूछा, “अंकल ने कैसे दर्द किया?” तो वो हँसकर चुप हो गईं।

मेरे फिर पूछने पर उन्होंने कहा, “अंकल ने कल काफी देर तक सेक्स किया।” मैंने पूछा, “सेक्स किया का क्या मतलब होता है?”

तो उन्होंने कहा, “तुम्हारे अंकल का लंड इसमें डालने को सेक्स कहते हैं।” मैंने कहा, “इसमें कैसे जाता है अंकल का लंड?”

तो उन्होंने कहा, “जाता है और इसमें एक छेद है, जरा अच्छे से देखो।” मैंने देखा तो उसमें एक छेद था। आंटी ने कहा, “तुम्हारे अंकल का लंड काफी बड़ा है इसलिए मुझे दर्द होता है।”

मैंने देखा कि आंटी की फुद्दी से पानी निकल रहा है तो मैंने कहा, “आंटी आपको सु-सु आ रही है?” तो आंटी ने कहा, “नहीं, ये सु-सु नहीं है, ये माल है।” खैर कोई बात नहीं, अभी तुम घर जाओ और किसी से भी मत कहना ये बात।

फिर कुछ दिन तक अंकल रोज घर पर ही रह रहे थे और आंटी पाउडर भी नहीं लगवा रही थीं और मैं शहर आ गया। ठीक एक साल बाद मैं वापस गाँव गया तो आंटी के पास भी गया। आंटी मुझसे मिलकर खुश हुईं। तब तक मैं सेक्स के बारे में बहुत कुछ जान चुका था।

फिर एक दिन मैं आंटी के पास गया। हम लोगों ने काफी देर तक बात की। फिर मैंने पूछा, “अभी भी अंकल आपको यहाँ दर्द करते हैं?” तो आंटी हँसते हुए बोलीं, “हाँ।”

फिर मैंने आंटी से पूछा, “आंटी सेक्स करना किसे कहते हैं?” तो आंटी ने कहा, “बताया तो था।” मैंने कहा, “मैं भूल गया।”

तो आंटी मुझे अंदर ले गईं और कहा, “तुम्हारे अंकल अब सेक्स नहीं करते, वो बूढ़े हो गए हैं।” कहकर आंटी बेड पर बैठ गईं। मैं भी उनके बाजू में बैठ गया।

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आंटी ने कहा, “चलो मैं तुम्हें बताती हूँ कि सेक्स कैसे करते हैं।” कहकर आंटी ने मेरी टी-शर्ट उतार दी और अपनी साड़ी भी खोल दी। फिर आंटी ने धीरे से अपना लहँगा उतारा। अब आंटी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं और मैं सिर्फ पैंट में। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर आंटी ने मेरा पैंट उतार दिया। पैंट उतारते ही मेरा लंड सामने आ गया। वो अभी छोटा था, तना नहीं था। फिर आंटी ने अपनी ब्रा और पैंटी दोनों उतार दी। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थीं। मैं उनको देखकर काँग रह गया। क्या जबरदस्त था आंटी का जिस्म!

अब मेरा लंड धीरे से तन रहा था। आंटी ने उसे हाथ में लेकर मसलना शुरू किया। तो मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया। अब मेरा लंड 6 इंच का हो चुका था। आंटी ने कहा, “तुम्हारा लंड अब बड़ा हो गया है। क्या इसमें से माल निकलता है?”

तो मैंने कहा, “सिर्फ सु-सु निकलती है।” तो वो हँस पड़ीं और कहा, “तो फिर सेफ है।”

आंटी कुछ देर तक मेरे लंड से खेलती रहीं। फिर वो मुझे बेड पर लिटाकर मेरे ऊपर आ गईं और मेरे लंड को अपनी चूत के नीचे रखकर ऊपर-नीचे होने लगीं जिससे मेरा लंड आंटी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे काफी मजा आ रहा था।

आंटी ऐसा करीब 5 मिनट तक करती रहीं। फिर आंटी थक गईं और मेरा लंड अपनी चूत से निकाल दिया। आंटी की चूत से काफी पानी निकल रहा था। और आंटी ने मुझे उठने के लिए कहा और खुद लेट गईं बिस्तर पर। आंटी ने कहा, “राज बेटा अब तुम्हारी बारी है।” कहकर आंटी ने अपने पैर खोल दिए। अब मुझे आंटी की भीगी हुई चूत साफ दिख रही थी।

मैंने निशाना लेकर आंटी की चूत में अपना लंड डाल दिया। आंटी तड़प गईं, काफी तड़प गईं। शायद वो झड़ गई थीं। मैंने पूछा, “क्या हुआ आंटी?” तो उन्होंने कहा, “बस बेटा अपना लंड मेरी चूत में ही रहने दो और मेरे ऊपर लेट जाओ।”

आंटी के कहने के अनुसार मैंने अपना लंड आंटी की चूत में ही रखकर आंटी के ऊपर लेट गया। काफी देर हम लोग ऐसे ही पड़े रहे। मेरा लंड आंटी की चूत में भी तना हुआ था। करीब 10 मिनट अपना लंड आंटी की चूत में रखने के बाद मैंने फिर से एक धक्का लगाया।

तो आंटी हँसकर बोलीं, “चलो अब शुरू हो जाओ।” अब मैं शुरू हो गया और आंटी को धक्के मारने लगा। मेरा लंड छोटा होने के कारण आंटी की चूत में पूरा का पूरा अंदर चला गया। मैंने करीब 10 मिनट तक इसी तरह धक्के मारे।

इस बीच आंटी फिर से झड़ गईं पर इस बार उन्होंने रुकने के लिए नहीं कहा और कहा, “राज बेटा और जोर से… और जोर से…” आंटी के मुँह से जोर से की आवाज आ रही थी। अब मुझे अपने लंड में कुछ जलन महसूस होने लगी थी। पर आंटी की हालत बहुत खराब थी। वो सिर्फ मचल रही थीं मेरे नीचे। मैं उनके बूब्स को दबा रहा था, उनके लिप्स पर किस कर रहा था और मेरा लंड उनकी चूत में धूम मचा रहा था।

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इसी बीच मेरे लंड की जलन बहुत बढ़ने लगी थी। मैंने आंटी को कहा कि मेरे लंड में जलन हो रही है तो उन्होंने भी कहा कि उन्हें भी चूत में जलन हो रही है। शायद वो फिर से झड़ने वाली थीं और शायद मैं भी। मैं इसी तरह धक्के मारता जा रहा था और वो चीख रही थीं — “र्राााज्ज्ज जोर से… तेज… ” आंटी ने जोर से चीख मारी — “मर्रीiii…”

ये आंटी चौथी बार झड़ी थीं इस बार… अब मेरी हालत बुरी थी। आंटी झड़ चुकी थीं और उनकी आँखें ऊपर की ओर हो गई थीं। अब मेरी हालत और खराब हो गई थी। आंटी जो कि अपने चूतड़ उछाल-उछालकर चुदाई कर रही थीं, रुक गई थीं। अब मुझे ऐसा लगा मानो जैसे मेरे लंड से कुछ बाहर आने वाला है। फिर क्या था, मैं चीख पड़ा — “आउटे…”

और फिर एकदम मेरे लंड से कुछ गर्म-गर्म सी चीज तेजी से साथ निकली और आंटी की चूत में चली गई… आंटी चीख मारी मगर वो पूरी तरह मेरे नीचे थीं और मैं एकदम झड़कर उनके ऊपर गिर गया। आंटी एकदम परेशान हो गईं और मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और उठकर खड़ी हो गईं और पूछा, “तुम कैसे झड़ गए?”

मैंने कहा, “मुझे नहीं मालूम।” तो उन्होंने कहा, “तुम अभी बच्चे हो इसलिए मैंने तुम्हारे साथ सेक्स किया पर तुम तो झड़ गए मेरे अंदर… हे भगवान… अब क्या होगा…”

मैंने कहा, “क्या हुआ?” तो उन्होंने कहा, “जो चीज तुमने अंदर डाली है उससे बच्चा पैदा होगा।” मैं डर गया…

फिर आंटी जल्दी से बाथरूम में गईं और टब में पैर फैलाकर खड़ी हो गईं और मुझे बुलाकर कहा, “राज अंदर हाथ डालकर जो तुमने अंदर छोड़ा है अपना रस वो बाहर निकालो।”

मैंने अंदर हाथ डालकर आंटी की चूत अच्छे तरह से धोया। मेरा लंड एकदम सूखकर चूहे के तरह छोटा हो चुका था।

आंटी और मैं बाथरूम से बाहर आए और अपने-अपने कपड़े पहने। आंटी ने कहा कि उन्हें शायद पहली बार इतना मजा आया सेक्स करके। और मुझे कहा, “राज तुम लकी हो जो अपना पहला पानी किसी औरत के अंदर छोड़ा।”

मैंने कहा, “वो पानी कैसा होता है?” तो आंटी ने पूछा, “क्या देखना है?” तो मैंने हाँ कर दी।

और आंटी ने अपना ब्लाउज और ब्रा खोल दी और कहा, “तुम सिर्फ मेरे बूब्स से खेलो और अपना लंड मेरे को दे दो।” कहकर आंटी मेरे लंड से खेलने लगीं। काफी देर तक मैं उनके बूब्स से खेलने लगा। फिर मुझे वैसी ही जलन होने लगी मेरे लंड में। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैंने कहा, “आंटी मुझे जलन हो रही है।” तो उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और कहा, “अब देखो निकलेगा माल इसमें से…” फिर मेरे लंड में से एक पिचकारी निकली व्हाइट कलर की और आंटी के फेस पर गिर गई। आंटी हँसने लगीं और मेरा कम चाट लिया और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं और अपने हाथ में मेरा कम लेकर मुझे बताया और कहा, “इसी को कहते हैं माल…” मैं काफी खुश था। फिर जितने दिन मैं गाँव में रहा हमने रोज सेक्स किया और मैं अपना पानी बाहर छोड़ता था।

आंटी मुझे पानी अंदर छोड़ने नहीं देती थीं। आंटी हमेशा मुझे अपना लंड अंदर रखकर उनके ऊपर सो जाने को कहती थीं। कई बार मैं अपना लंड उनकी चूत में ही रखकर उन पर एक-एक घंटा सो जाता था। फिर नींद से वो ही मुझे जगाती थीं। कई दिन सेक्स इसी तरह चलता रहा। फिर दो महीने रोज सेक्स करने के बाद मेरा पानी कम निकलने लगा मेरे लंड से। आंटी हँसते हुए बोलीं, “बेटे दूध पिया करो खूब…” फिर मेरी छुट्टियाँ खत्म होने के बाद मैं शहर वापस आ गया। आगे की कहानी बाद में…

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